अध्यक्ष महोदय,
माननीय राज्यपाल महोदया ने अपने अभिभाषण में सरकार की सोच एवं प्राथमिकताओं को संक्षिप्त रूप में सदन के माध्यम से जनता के सामने रखा है।
मुझे खुशी है कि झारखंड की जनता ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य के गरीब जनता के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के लिए हमें कुछ करने का एक अवसर दिया है। इस सदन के माध्यम से मैं राज्य की सवा तीन करोड़ जनता को नमन करता हूँ तथा इस विश्वास और भरोसे के लिए उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।
-पांच वर्षों तक विपक्ष का नेता रहना भी मेरे लिए एक सुखद और उपयोगी अनुभव रहा है। पिछले पांच वर्षों में मैं लगातार जनता के सम्पर्क में रहा। उनके दुख-दर्द को जाना और दुख-दर्द के कारणों को समझने का प्रयास भी किया। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मौलिक सुविधाओं और अधिकारों से जनता की दूरी ने मुझे यह अहसास कराया कि एक राजनेता के रूप में हम और हमारे राजनीतिक सहयोगी दुखद रूप से विफल रहे हैं। अपनी जनता से उनका अधिकार दिलाने का हमने वादा किया। जनता ने भी मेरी बातों पर भरोसा किया और अपना आशीर्वाद मुझे दिया है। आज के साथ गठबंधन को सरकार बनाने का अवसर मिला है। मैं यह दृढ़ता के साथ कहना चाहूँगा कि मैं यहां मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि शोषण के विरूद्ध संघर्ष और शहादत के प्रतीक चिन्ह के रूप में खड़ा हूं।
-झारखंड आन्दोलनकारियों के सपनों को साकार करने झारखंडियों को उनका अधिकार दिलाने तथा वंचितों, गरीबों, आदिवासियों, दलितों अल्पसंख्यकों युवाओं और महिलाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती सिर्फ सरकार के सामने ही नहीं, बल्कि इस सदन के सामने भी है।
-सदन के सामने जन आकांक्षाओं पर खरा उतरने की भी चुनौती है। मैं गत विधानसभा में लगातार कहता रहा कि संख्या बल के आधार पर जन भावनाओं को नहीं रौंदा जाय। दबे-कुचले, वंचितों, गरीबों और आदिवासियों के अधिकारों को नहीं छीना जाय, उनके संवैधानिक सुरक्षा कवचों पर हमला नहीं किया जाय, लेकिन वो सुननेवाली सरकार नहीं थी।
-अब जनता ने एक सुनने वाली सरकार चुनी है। हम सबकी सुनेंगे- पक्ष की भी, विपक्ष की भी। आसन की भी, मीडिया की भी। विद्वानों की भी, सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी, युवाओं की भी, बुजुर्गों की भी। यह सुननेवाली सरकार है। मैं समाज के तमाम वर्गों से, राज्य और देश के तमाम नियामक संस्थाओं से, विद्वानों और गैर सरकारी संस्थाओं से,लोकतंत्र के प्रहरी मीडिया संस्थाओं से स्वस्थ्य एवं सकारात्मक आलोचनाओं को आमंत्रित करता हूं।
-मेरे लिए आलोचनाएं वो आईना होंगी, जिसमें सरकार अपना चेहरा साफ-साफ देख सकेगी। लक्ष्यों से टकराव को भांप सकेगी। लक्ष्यों से भटकाव को भांप सकेगी। अपनी गलतियों को समय रहते पहचान सकेगी और खुद सुधार कर सकेगी। मैं विचारों और आलोचनाओं के स्वच्छन्द पक्षी को सत्ता के पिंजरे में कैद नहीं करूंगा। जब कोई संघर्ष से तप कर निकलता है, तो वह एक बेशकीमती संपत्ति अर्जित करता है और वह है उसका आत्मबल। आज मैं पूरे आत्मबल के साथ सकारात्मक आलोचनाओं को स्वीकार करने तथा खुद में सुधार करने की इच्छाशक्ति के साथ सदन में खड़ा हूँ एवं सकारात्मक आलोचनाओं को आमंत्रित करता हूं।
-मुझे खुशी है कि आज मैं जिस सदन के नेता के रूप में खड़ा हूं, उस सदन में राज्य के कई विद्वान और अनुभवी राजनेता माननीय सदस्य के रूप में मौजूद हैं। मैं गौरव के साथ कहता हूं कि यह सदन अनुभव और युवा उर्जा का अद्भुत संगम है और उनमें समन्वय करना मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन, अपने अनुभव, योग्य एवं संवेदनशील सहयोगियों के आशीर्वाद, सहयोग और मार्गदर्शन से हमारी सरकार एक ऐसी लकीर खींच पाने में सफल होगी, जो गरीबों के तकदीर को नये तरीके से लिखेगी। हमारी सरकार संरचना निर्माण आधारित विकास नहीं बल्कि व्यक्ति निर्माण आधारित विकास मॉडल पर काम करेगी।
-संरचना निर्माण आधारित विकास का लाभ गरीबों की झोपड़ियों तक नहीं पहुंचा। नेता और अफसर के तिजोरी को भरनेवाले विकास की धारा को हम समाप्त करेंगे। हमारी सरकार की विकास धारा जरूरतमंदों, गरीबों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के दिल और दिमाग दोनों को सींचेंगी। ये विकास महसूस भी किया जायेगा और बिना सरकारी विज्ञापन के दिखेगा भी। यह अखबारों और टीवी चैनलों पर दिखनेवाला विकास नहीं होगा, बल्कि गरीबों के चूल्हे और चेहरों पर चमकनेवाला विकास होगा हम यह वादा इस सदन के सम्पूर्ण सहयोग की अपेक्षाओं के साथ राज्य की जनता से करते हैं।
-हमारी सरकार ने अपने वायदे पर पहले दिन से ही काम करना प्रारंभ कर दिया है। अपने अनुपूरक बजट में हमने आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, पारा शिक्षकों, वृद्धावस्था पेंशन, मदरसा शिक्षकों, छात्रवृत्ति, जनजातीय पेंशन योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना, आयोडीन युक्त नमक तथा युवाओं के कौशल विकास के लिए धन की व्यवस्था ठेकेदारी वाले विभाग से धन काटकर किया है। ये हमारी सरकार की भावी रणनीति का संकेतक है। हमारी सरकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पर्यटन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने विकास नीतियों का निर्धारण करेगी। माननीय राज्यपाल महोदया ने हमारी सरकार के भावी स्वरूप को सदन के माध्यम से राज्य की जनता के सामने रखा है।
-हम सभी मिलकर इसे मूर्त रूप देंगे। वाणिज्य एवं कर तथा खनन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाकर तथा इन विभागों के न्यायालयों में लंबित मामलों का निपटारा कर लगभग 15 हजार करोड़ रूपये जुटाये जा सकते हैं। साथ ही, अन्य विभागों में पारदर्शिता तथा ईमानदारी लाकर अरबों रूपये बचाये जा सकते हैं। हमने उपयुक्त दिशा में त्वरित कार्रवाई का निर्देश मुख्य सचिव तथा एडवोकेट जनरल को दिया है। हम यह स्पष्ट करना चाहेंगे कि राज्य के खजाने पर पहला अधिकार गरीबों का है।
-नौकरशाही जनता के प्रति जिम्मेवार हो, जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाये, नियम कानून के दायरे में काम करे, समय की पाबन्दी रखे तथा वंचितों के प्रति संवेदनशील हो। नौकरशाही को इन पाँच मानकों पर परखा और मापा जाएगा। साथ ही, सरकार और सरकार के लिए काम कर रहे कर्मियों के भयादोहन की इजाजत भी किसी को नहीं होगी।
-हाल के वर्षों में नौकरशाही का राजनीतिकरण हुआ है। सरकारी अफसरों को सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के कार्यकर्ता की तरह कार्य करना एक खतरनाक प्रवृत्ति है। हमारी सरकार इस चुनौती से अवगत है तथा नौकरशाही को जनता के प्रति जिम्मेदार बनाने के लिए कृतसंकल्पित है । इस विषय पर हमारी सरकार कठोरता से आगे बढ़ेगी। साथ ही ऐसा माहौल बनाएगी कि सरकारी कर्मी भयमुक्त होकर पूरे मनोबल के साथ अपना काम कर सके।
आज झारखंडियों के लिए जश्न का दिन है, लेकिन उन्माद का नहीं। जब आप में सत्य-बोध होता है तो आप उन्मादी होते हैं लेकिन, जब आपमें जिम्मेदारी बोध होता है तो आप शालीन होते हैं। आज राज्य के हर नागरिक को जिम्मेदारी बोध के साथ आगे बढ़ना होगा। झारखंडियों को यह ध्यान रखना होगा कि हमारी खुशियाँ किसी के लिए खतरा नहीं बने, असुरक्षा का कारण न बने। हमारा जश्न किसी का जख्म न बनें। तभी हम झारखंड के शहीदों तथा पूर्वजों के बलिदान की भावनाओं के अनुरूप काम कर पाएंगे। हमारी सरकार एक समावेशी झारखंड के निर्माण की दिशा दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ेगी और सबको उनका हक मिले इसका पूरा प्रयास करेगी।
धन्यवाद।

