श्रावणी मेला 2019: देवघर में हो विश्वस्तरीय व्यवस्था, जून से ही करें तैयारियों की समीक्षा


    17 जुलाई से 15 अगस्त तक चलने वाले श्रावणी मेले को श्रद्धालुओं के लिए यादगार बनाने की तैयारियों में राज्य सरकार जुट गई है। मुख्य सचिव डॉ. डीके तिवारी ने मेले की तैयारियों से जुड़े सभी विभागों के सचिवों को निर्देश दिया है कि वे जून महीने में ही देवघर जाकर मौके पर तैयारियों की समीक्षा करें। श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर मेला में जो भी जरूरी कार्य उचित लगे, उसके सफल क्रियान्वयन की व्यवस्था करें। उन्होंने मेला में विभिन्न कार्यों के लिए प्रतिनियोजित होने वाले अधिकारियों और कर्मियों की प्रतिनियुक्ति समय रहते करने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव ने ये बातें झारखण्ड मंत्रालय में श्रावणी मेले को भव्य बनाने की तैयारियों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक में कही।

    मुख्य सचिव ने राज्य के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव श्रावणी मेले की ब्रांडिंग करने का निर्देश दिया है। इसके लिए उन्होंने श्रावणी मेले से जुड़े प्रतीक चिह्न और ऑफिसियल प्रसाद दिल्ली स्थित तमाम राज्यों के कार्यालयों में भेजने को कहा है। उन्होंने कहा कि इसे हम राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी भेजें। इसके लिए उन्होंने दिल्ली स्थित झारखण्ड भवन के लोगों का सहयोग लेने का निर्देश दिया। वहीं, मेले के विभिन्न पहलुओं को उजागर कर दो से तीन मिनट का वीडियो क्लिप यू-ट्यूब समेत तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अपलोड करने का निर्देश दिया।

    मुख्य सचिव ने श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि बताते हुए निर्देश दिया है कि ऐसी व्यवस्था करें कि श्रद्धालु अपने साथ एक सुखद अनुभूति लेकर लौटें। उन्होंने कहा कि ये हमारे असली ब्रांड एम्बेस्डर होंगे। ये लोग ही अपने गांव और शहर में अपने मुख से श्रावणी मेले की उत्तम व्यवस्था का बखान करेंगे। उन्होंने कहा कि मेले में ऐसी व्यवस्था करें कि श्रद्धालु को पता चले कि वे कहां की तस्वीर खींच कर यादगार के रूप में अपने साथ ले जा सकते हैं। उन्होंने अलग-अलग जगहों पर सेल्फी प्वाइंट बनाने का भी निर्देश दिया। साथ ही शौचालयों की संख्या बढ़ाने का निर्देश देते हुए सहज उपलब्ध शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने को कहा।

    मेले में लगे प्रशासनिक कैंपों में स्ट्रेचर तथा ह्वील चेयर की व्यवस्था रखने का निर्देश मुख्य सचिव ने दिया है। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि लंबी यात्रा कर आने वाले श्रद्धालुओं को डिहाइड्रेशन की शिकायतें होती हैं। उनके लिए ग्लुकोज की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही मेडिकल कैंपों में जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क दवा वितरण की कारगर व्यवस्था करने का निर्देश दिया। मेले में फायर फाइटिंग सिस्टम को चाक-चौबंद रखते हुए उसकी लगातार जांच करते रहने का भी निर्देश दिया।

    मुख्य सचिव ने बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पौधारोपण पर बल देते हुए कहा कि आज किया गया यह काम आगे आने वाले समय में अपनी महत्ता साबित करेगा। उन्होंने मेले के दौरान स्कूलों को बंद कर उसके भवनों के उपयोग के बारे में यह निर्देश दिया कि बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो, इसका ध्यान रखें। उन्होंने खाली पड़े भवनों का उपयोग का निर्देश देते हुए कहा कि बहुत जरूरी होने पर आस-पास के दो स्कूलों को मिलाकर एक के भवन का उपयोग प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जा सकता है।

    देवघर और दुमका के उपायुक्तों ने श्रावणी मेले की तैयारियों को लेकर एक प्रेजेंटेशन दिया। बाबा बैद्यनाथ के सुगम दर्शन से लेकर श्रद्धालुओं के लिए बिजली, पानी, ठहरने, आने-जाने जैसे तमाम पहलुओं पर की जा रही तैयारियों को बताया। उन्होंने बताया कि देवघर श्रावणी मेले में पिछले वर्ष 38 लाख तथा बासुकीनाथ में 28 लाख श्रद्धालु आए थे। इस वर्ष यह संख्या और बढ़ेगी। वहीं, दोनों जिलों के आरक्षी अधीक्षकों ने कानून व्यवस्था से जुड़े मसलों पर अपनी तैयारियों की रूपरेखा से अवगत कराया।

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री केके खंडेलवाल, डीजीपी श्री कमल नयन चौबे, ऊर्जा सचिव श्रीमती वंदना डाडेल, नगर विकास सचिव श्री अजय कुमार सिंह, पर्यटन सचिव श्री राहुल शर्मा, पथ निर्माण सचिव श्री केके सोन, पेयजल एवं स्वच्छता सचिव श्रीमती आराधना पटनायक, भवन निर्माण सचिव श्री सुनील कुमार, एडीजी श्री पीआर के नायडु, एडीजी श्री मुरारीलाल मीणा, एडीजी श्रीमती तदाशा मिश्रा आदि शामिल थे।