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गढ़वा जिले में बनेगा बराज, क्षेत्र में खत्म होगी सिंचाई की समस्या


    भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में सोमवार को उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस समिति के समक्ष झारखंड सरकार के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री डीके तिवारी की अगुवाई में विभाग के मुख्य अभियंता और अन्य अभियंताओं के द्वारा राज्य सरकार की सिंचाई परियोजना कनहर बराज पर विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान एक प्रजेंटेशन भी प्रस्तुत किया गया। इस परियोजना में गढ़वा जिले के रंका प्रखंड के खूरी गांव में बराज बनाया जाएगा। इस बराज से 17.10 किमी लंबी  मुख्य नहर निकलेगी, जो लावादोनी तक जाएगी, जहां एक डैम बनाया जाएगा। जिसका अधिकतम जल स्तर 308 मीटर होगा। इस डैम से दो नहर क्रमशः बांयी और दाहिनी मुख्य नहरें निकलेंगी। जो 82.22 तथा 46.97 किमी लंबी होंगी ।

    इस परियोजना से 53,283 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी बता दें, बांयी नहर से एक प्रतापपुर ब्रांच नहर निकलेगी जो 25.7 किमी लंबी होगी। इस परियोजना से 53,283 हेक्टेयर क्षेत्र (CCA)में सिंचाई होगी। सुखाड़ से लगातार 
    प्रभावित गढ़वा जिले के लिए ये योजना एक वरदान साबित होगी। गढ़वा जिले के 10 प्रखंड गढ़वा, मेराल, रमना, डंडई, नगरउंटारी, बिशुनपुरा, कांडी, मझियांव, केतार, भवनाथपुर और पलामू जिले का चैनपुर प्रखंड इस परियोजना से लाभान्वित होंगे। इस परियोजना में पीने के पानी और नए उद्योगों के लिए भी पानी का प्रावधान किया गया है। कुल मिलाकर 27 लाख 40 हजार व्यक्तियों को इसका लाभ मिल सकेगा। इस परियोजना से कई जलाशयों, आहरों और तालाबों को अतिरिक्त पानी देकर पूरे क्षेत्र को 
    सुखाड़ के प्रभाव से मुक्त किया जाएगा।

    परियोजना की ये है खासियत

    इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसके डूब क्षेत्र से एक भी व्यक्ति विस्थापित नहीं होगा। परियोजना की वर्तमान लागत 1908 करोड़ रुपए है जिस पर आज केंद्र सरकार की सलाहकार समिति के द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है। झारखंड के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। बैठक में केन्द्र सरकार के वित्त मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और नीति आयोग के वरीय पदाधिकारीगण सहित केन्द्रीय जल आयोग के अध्यक्ष ने भाग लिया।